हमसुख़न 1.0

धाम, साहित्य को ख़वास से आवाम तक लाने के अपने प्रयास को लेकर प्रतिबद्ध है। इस दिशा में अपने कार्य को आगे बढ़ाते हुए हमने हर माह एक साहित्यिक आयोजन रखने का वादा किया था जो कि “हमसुखन” के रूप में धरातल पर आया। 20 अक्टूबर की शाम 3 बजे आयोजित हुई हमसुख़न की महफ़िल हम सभी के प्रेरणास्रोत स्व. डॉ निर्मल दर्शन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रारम्भ हुई। तत्पश्चात कार्यक्रम में 10 नवांकुर कवियों/शायरों ने अपनी रचनायें सुनायी। प्रत्येक काव्यपाठ के बाद उस रचना पर विस्तृत चर्चा की गई। आयोजन का संचालन श्री सलमान ‘ख़याल’ जी ने किया जो स्वयं अच्छे शायर हैं और काव्य व्याकरण पर अच्छी जानकारी रखते हैं। आयोजन में मशहूर शायर श्री अभिषेक शुक्ल, डॉ अहमद अयाज़, श्रीमती आयशा अयूब, श्री अनुज “अब्र”, संस्कृत, उर्दू व फ़ारसी भाषा के विद्वान श्री सर्वेश त्रिपाठी समेत बहुत से गुणीजन उपस्थित रहे व उन्होंने चर्चा में भाग लिया ।

 

 

 

 

 

काव्यपाठ के बाद साहित्यिक पुस्तकों पर चर्चा का भी एक सत्र चला जिसमें विभिन्न भाषाओं और विधाओं की पुस्तकों पर बात की गयी।

कार्यक्रम के अंत में एक “बुक क्लब” गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया जिससे ऐसे पाठकों को निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध करायी जा सकें जो किसी कारण से पुस्तकें खरीद कर पढ़ने में सक्षम नहीं हैं। “धाम बुक क्लब” की रूपरेखा तैयार की जा रही है जिससे कि इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके।

 

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