Dhaam

Anomalisa: A Rare Perfection?

Anomalisa is a 2015 stop-motion animation comedy-drama film directed by Charlie Kaufman and co-directed by Duke Johnson. Charlie Kaufman wrote screenplays for films like Being John Malkovich (1999), Adaptation (2002), Eternal Sunshine of the spotless mind (2004) and Synecdoche, New York (2008). https://www.youtube.com/watch?v=WQkHA3fHk_0 In his films, Kaufman often explores human nature and concepts like mortality, identity crises and meaning of life. He first wrote Anomalisa for a radio play in 2005 and later decided to make a full length animated feature film. It is Kaufman’s first animated film and he did not choose CGI animation which is so common and in...

दास्तानगो अंकित चड्ढा की याद में…

( http://www.chubhan.today से साभार ) आज पता नही क्यों दिल में एक टीस सी है और एक माँ का चेहरा मेरी आँखों के आगे घूम रहा है जिसने अभी कुछ महीनों पहले अपने ऐसे होनहार बेटे को खोया है जिसका जाना हम जैसे न जाने कितने लोगों के दिल को आज भी असीम वेदना से भर देता है।मैं बात कर रही हूँ अंकित चड्ढा की जो दास्तानगोई की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम है और किसी परिचय का मोहताज नहीं।कहानी कोई भी हो उसे अपने अंदाज़ से अंकित ऐसा रूप देता था कि सुनने वाले उसके मुरीद हुए बिना...

Pyaasa: The Greatest Indian Film Ever?

Director- Guru Dutt Story- Abrar Alvi Music- Sachin Dev Burman Lyrics- Sahir Ludhianvi History of Indian Cinema is now more than 100 years old but there have been only a few instances where we have truly cherished its brilliance.  Satyajit Ray, Bimal Roy and Guru Dutt have made some really impactful cinema on which we can feel proud even today.  One such masterpiece in the Bollywood world is Guru Dutt’s “Pyaasa”. Today, we will talk about this life-changing movie and how the characters of this movie gave Indian cinema a new milestone to be proud of. Through ‘Pyaasa’ we witnessed one of the greatest...

चिट्ठी के नाम खुला ख़त

डिअर चिट्ठी, कहाँ हो आजकल, बहुत दिन हुए तुम आयी नहीं | व्यस्त हो ? बचपन में जब तुमसे पहली बार मिलना हुआ था तब पांच साल का था | तुम कही दूर से आई मेज़ पर पड़ी आराम फ़रमा रही थी कि तभी दादा जी बोले “खोल और पढ़ इसे” | जब तक शब्दों की ईंटें जोड़ जोड़कर मानी की इमारत खड़ी कर पाता, तुम्हारी बातें समझ पाता, तब तक दादाजी के हाथ मेरे चेहरे के दोनों तरफ उगी खटाई नुमा नॉब्स तक पहुच गए थे और ‘ट्यूनिंग’ का काम शुरू हो चूका था|कान्वेंट की पढाई से हिंदी और अन्य...

Dhaam Presents “षडज”

हमारे जीवन में कुछ लोग ऐसे आते हैं जो आहिस्ता आहिस्ता बेहद कोमलता से हमारे अंतर्मन की गहराई में उतरते जाते हैं। यही अभिव्यक्ति हमारे जीवन में डॉ निर्मल दर्शन जी की है जिन्हे प्यार से हम सब निर्मल दद्दा कहकर पुकारते हैं। उनका साहित्य के साथ साथ हम सबके जीवन में अभूतपूर्व योगदान है।अतिशयोक्ति नहीं होगी अगर ये कहा जाए कि मुहब्बत और इंसानियत का कोई चेहरा होता तो हूबहू दद्दा जैसा दिखता। उनके जैसा ममतामई व्यक्तित्व मिलना दुर्लभ है। कहते हैं कि अच्छा कलाकार बनने के लिए आपको एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है और दद्दा इस कथन...

Worth reading

दास्तानगो अंकित चड्ढा की याद में…

( http://www.chubhan.today से साभार ) आज पता नही क्यों दिल में एक टीस सी है और एक माँ का चेहरा मेरी आँखों के आगे घूम...

चिट्ठी के नाम खुला ख़त

डिअर चिट्ठी, कहाँ हो आजकल, बहुत दिन हुए तुम आयी नहीं | व्यस्त हो ? बचपन में जब तुमसे पहली बार मिलना हुआ था तब...