Dhaam Presents “षडज”

हमारे जीवन में कुछ लोग ऐसे आते हैं जो आहिस्ता आहिस्ता बेहद कोमलता से हमारे अंतर्मन की गहराई में उतरते जाते हैं। यही अभिव्यक्ति हमारे जीवन में डॉ निर्मल दर्शन जी की है जिन्हे प्यार से हम सब निर्मल दद्दा कहकर पुकारते हैं। उनका साहित्य के साथ साथ हम सबके जीवन में अभूतपूर्व योगदान है।अतिशयोक्ति नहीं होगी अगर ये कहा जाए कि मुहब्बत और इंसानियत का कोई चेहरा होता तो हूबहू दद्दा जैसा दिखता। उनके जैसा ममतामई व्यक्तित्व मिलना दुर्लभ है।

कहते हैं कि अच्छा कलाकार बनने के लिए आपको एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है और दद्दा इस कथन का सजीव एवं सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। उनके मन की झोली में सबके लिए अथाह प्रेम है।

यही कारण है कि 7 जुलाई 2019 को गोमती नगर स्थित उर्दू एकेडमी में धाम ने “षड्ज”, एक मनोरम संगीतमय शाम, का आयोजन किया तो उसका केंद्र बिंदु निर्मल दद्दा ही रहे। कार्यक्रम में कई सुप्रसिद्ध शायरों की ख़ूबसूरत ग़ज़लें और नज़्में प्रोग्रेसिव संगीत के साथ प्रस्तुत की गईं,जो एक रमणीय संगम साबित हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ दद्दा द्वारा लिखित एक अत्यंत सुंदर गीत “तरुणाई” से हुआ, फिर जौन एलिया साहब,मुनीर नियाज़ी साहब,अभिषेक शुक्ला भैया (जो हमारे बड़े भाई हैं और हम लोगों का उत्साह बढ़ाने के लिए स्वयं उपस्थित थे) , इरफ़ान सिद्दीक़ी साहब, दुष्यंत कुमार साहब, मजाज़ लखनवी साहब जैसे महान शायरों की गज़लें और नज़्में सभा की शोभा रहीं। षडज बैंड के गायक कार्तिक मिश्र, तबला वादक शिवार्घ भट्टाचार्य, बेस गिटारिस्ट आदित्यप्रताप सिंह, लीड गिटारिस्ट हर्षवर्धन सिंह एवम् रिदम गिटार पर पोरस श्रीवास्तव का प्रदर्शन इतना अद्भुत एवम् विशुद्ध था कि सभागार में बैठा प्रत्येक व्यक्ति झूम उठा और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज गया।

सभी श्रोताओं के थिरकते हांथ पैर और मुख पर मुस्कान के साथ कार्यक्रम अपने समापन को पहुंचा तो श्रोताओं के निवेदन पर बैंड ने “तरुणाई गीत” पुनः प्रस्तुत किया, और इस बार उनका साथ दिया स्वयं हमारे प्यारे निर्मल दद्दा ने…

तरुणाई तरुणाई
हम सबके जीवन की पहली अंगड़ाई
तरुणाई तरुणाई

ये बोल जब दद्दा ने गुनगुनाए तो सभागार में उपस्थित हर व्यक्ति की आँख छलछला उठी। जैसे कुछ वक्त के लिए सारा बृह्मांड प्रेममय हो गया और आयोजन का उद्देश्य वास्तव में सफल हुआ। इस तरह कार्यक्रम की समाप्ति दद्दा की स्नेहिल आवाज और हम सबकी भावुक आंखों से हुई।

 

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